झाबुआ से श्याम त्रिवेदी की रिपोर्ट
जिला स्वास्थ्य समिति की कार्यकारी बैठक संपन्न।
कलेक्टर ने मेडिकल ऑफिसर्स से की वन-टू-वन चर्चा।
झाबुआ। जिला स्वास्थ्य समिति की कार्यकारी बैठक कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान एएनसी रजिस्ट्रेशन, चौथा एएनसी चेकअप, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की स्थिति, टीकाकरण कार्यक्रम, टीबी मुक्त भारत अभियान, सिकल सेल स्क्रीनिंग तथा यूविन पोर्टल की प्रगति पर गहन चर्चा की गई।
बैठक में गत वर्ष की तुलना में चालू वर्ष के एएनसी रजिस्ट्रेशन की समीक्षा की गई, जिसमें 5.56 प्रतिशत की कमी पाई गई। इस पर कलेक्टर ने कम प्रदर्शन करने वाले उप स्वास्थ्य केंद्रों की समीक्षा करते हुए संबंधित बीएमओ से चर्चा की और शत-प्रतिशत एएनसी रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
चौथे एएनसी चेकअप की समीक्षा में बताया गया कि कुल 30,183 एएनसी रजिस्ट्रेशन के विरुद्ध मात्र 11,761 गर्भवती महिलाओं का चौथा एएनसी चेकअप किया गया है। इस पर कलेक्टर ने कम प्रगति वाले सेक्टर सुपरवाइजर एवं सब-हेल्थ सेंटरों की पृथक समीक्षा कर कारणों की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि एएनसी चेकअप एवं हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग में सेक्टर सुपरवाइजर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। समस्त बीएमओ, डॉक्टर एवं बीपीएम को रोस्टर बनाकर नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने मेडिकल ऑफिसर्स से वन-टू-वन चर्चा कर उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने को कहा, जहां विगत वर्षों में मातृ अथवा शिशु मृत्यु की घटनाएं हुई हैं। साथ ही सीएचओ द्वारा की जा रही जांच प्रक्रिया को सुव्यवस्थित एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के निर्देश भी दिए।
बैठक में हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं के चिन्हांकन, समय पर रिपोर्टिंग, नियमित फॉलोअप एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। मॉडरेट एनीमिक गर्भवती महिलाओं की समीक्षा में पाया गया कि चिन्हांकित महिलाओं में से केवल 30.30 प्रतिशत का ही प्रबंधन किया गया है। वहीं सीवियर एनीमिक गर्भवती महिलाओं के प्रबंधन में भी अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर कलेक्टर ने असंतोष व्यक्त करते हुए सुधार के निर्देश दिए।
गर्भावस्था प्रेरित उच्च रक्तचाप की समीक्षा में कम चिन्हांकन पाए जाने पर कलेक्टर ने झाबुआ, राणापुर एवं थांदला विकासखंडों में विशेष रूप से प्रभावी कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एएनसी रजिस्ट्रेशन, चौथा एएनसी चेकअप तथा हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान एवं प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
कलेक्टर ने कम प्रदर्शन करने वाले उप स्वास्थ्य केंद्रों, सेक्टर सुपरवाइजर एवं फील्ड स्टाफ की जवाबदेही तय करते हुए साप्ताहिक समीक्षा अनिवार्य करने के निर्देश दिए। साथ ही बीएमओ एवं मेडिकल ऑफिसर्स को स्वयं फील्ड में जाकर निरीक्षण करने एवं नियमित रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया।
बैठक में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की समीक्षा करते हुए एसएनसीयू रिपोर्ट पर चर्चा की गई तथा प्रत्येक प्रकरण की गहन समीक्षा एवं सतत मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए।
टीकाकरण की समीक्षा के दौरान यूविन पोर्टल पर प्रगति 64.82 प्रतिशत पाई गई, जिसे बढ़ाने के निर्देश दिए गए। साथ ही एमआर-1 एवं एमआर-2 टीकाकरण के बीच के अंतर को पूर्ण करने पर भी जोर दिया गया।
सिकल सेल स्क्रीनिंग की समीक्षा में बताया गया कि कुल 1,741 रोगियों में से 1,100 से अधिक के दिव्यांगता प्रमाण पत्र तैयार किए जा चुके हैं। कलेक्टर ने गर्भवती महिलाओं में सिकल सेल स्क्रीनिंग की गति बढ़ाने के निर्देश दिए।
टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा में बताया गया कि जिले में अब तक 2,46,957 व्यक्तियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनमें से 2,063 टीबी रोगी चिन्हित किए गए हैं। अभियान अंतर्गत 1,917 निक्षय मित्र सक्रिय हैं। कलेक्टर ने सामाजिक संगठनों एवं सीएसआर के सहयोग से निक्षय मित्रों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए।
बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी.एस. बघेल, समस्त चिकित्सक, बीएमओ, मेडिकल ऑफिसर्स एवं संबंधित सुपरवाइजर उपस्थित थे।
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